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मौलाना मदनी के निर्देश पर जमीयत उलमा के प्रतिनिधिमंडल का हाथरस दौराप्रतिनिधिमंडल ने पीड़ितों से मिलकर मृतकों के परिजनों को दस हज़ार और घायलों को पााँच




मौलाना अरशद मदनी के निर्देश पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल का हाथरस दौरा

प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ितों से मिलकर मृतकों के परिजनों को दस हज़ार और घायलों को पााँच हज़ार रुपय की आर्थिक सहायता दी

सांप्रदायिक लोग दिलों में दूरियां पैदा करते हैं, जमीयत उलमा-ए-हिंद दिलों को जोड़ने का काम करती है:- मौलाना अरशद मदनी

नई दिल्ली, 6 जुलाई 2024

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के निर्देश पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने हाथरस घटना के दूसरे ही दिन से हाथरस का दौरा शुरू कर दिया था, आज प्रतिनिधिमंडल का यह तीसरा दौरा था, वो सोखना गाँव पहुंचा जहां एक ही घर के तीन लोग समेत इस घटना चार लोग मर गए थे, प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ितों के परिजनों से मिलकर आर्थिक सहायता के साथ साथ मौलाना मदनी का यह संदेश भी सुनाया जिसमें उन्होंने कहा है कि इस दुख की घड़ी में हम आपके साथ हैं, हमसे जो बन सका वो कर रहे हैं। अल्लाह आपको इस दुख को सहने का धैर्य और सब्र दे। इस पर मृतकों के परिजनों ने आंसू भरी आँखों के साथ कहा कि सत्संग का कार्यक्रम करने वाले भी हमारे पास नहीं आए और न ही किसी ने हमें सांत्वना दी, केवल आप लोग पहुंचे और सहायता के साथ सांत्वना दी, इसके लिए मदनी साहब का धन्यवाद। इससे पहले प्रतिनिधिमंडल ने हाथरस में उन अस्पतालों का दौरा किया जहां घायलों का उपचार चल रहा है। प्रतिनिधिमंडल की ओर से मृतकों के परिजनों को प्रति मृतक दस हज़ार और घायलों को पाँच हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

उल्लेखनीय है कि सरकार के अतिरिक्त अब तक किसी अन्य संगठन या संस्था ने यहां का दौरा नहीं किया। जमीयत उलमा-ए-हिंद ऐसा पहला संगठन है जो न केवल वहां पहुंचा बल्कि पीड़ितों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की। चूंकि पीड़ितों का सम्बंध किसी एक क्षेत्र या ज़िले से नहीं है बल्कि आस-पास के कई ज़िलों और क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग सत्संग में गए थे, इसलिए ज़िला और क्षेत्र की इकाइयों को यह निर्देश दिया गया है कि वह अपने अपने ज़िले और क्षेत्र में पीड़ितों के घर जाएं, उनके दुख में शरीक हों और आर्थिक सहायता पहुंचाएं।

उत्तर प्रदेश जमीअत उलमा के अध्यक्ष मौलाना सय्यद अशहद रशीदी इस सिलसिले में ज़िला इकाइयों से लगातार संपर्क में हैं। हाथरस जमीयत उलमा के अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद रमज़ान क़ासमी और महासचिच मौलाना फुरकान नदवी अपने साथियों के साथ पीड़ितों से लगातार मिल रहे हैं और घायलों की अस्पतालों में जाकर इयादत कर रहे हैं। मौलाना अरशद मदनी ने अपने एक बयान में कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद पिछली एक शताब्दी से देश में मुहब्बत बांटने का काम कर रही है, वह अपने रहात और कल्याण कार्य धर्म से ऊपर उठकर मानवता के आधार पर करती है। क्योंकि कोई मुसीबत या त्रासदी यह पूछ कर नहीं आती कि कौन हिंदू है और कौन मुस्लमान, बल्कि जब भी कोई मुसीबत आती है तो सबको अपने लपेट में ले लेती है। मुसीबत के समय जमीयत उलमा-ए-हिंद का सिद्धांत हमेशा मानव सेवा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक बड़ी मानवीव त्रासदी है मगर यह कितने दुख की बात है कि पीड़ितों का आंसू पोंछने के लिए वहां अब तक जमीयत उलमा-ए-हिंद के अतिरिक्त कोई संगठन नहीं पहुंचा। हमारे बड़ों ने इसके लिए जो रास्ता निर्धारित किया था अपनी 100 वर्षीय लम्बी यात्रा के दौरान उसे से एक इंच भी पीछे नहीं हटी है।

मौलाना मदनी ने कहा कि देश में ऐसे लोग भी हैं जो धर्म और कपड़ों से लोगों की पहचान करते हैं, हम ऐसे लोगों से कहना चाहते हैं कि वो आएं और धर्म और कपड़ों से लोगों की पहचान करें और देख लें कि ऐसे लोगों का काम और चरित्र किया है। देश में विभिन्न धर्मों और जाति के लोग सदियों से एक साथ रहते आए हैं परन्तु पिछले कुछ वर्षों से सांप्रदायिकता और धर्मिक हिंसा को जो बढ़ावा मिला और जिस तरह नफ़रत की राजनीति शुरू की गई उसने लोगों के बीच दूरियां पैदा करने का काम किया। जमीयत उलमा-ए-हिंद अपने काम और चरित्र से इस दूसरी को समाप्त करने का प्रयास करती आई है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल का हाथरस दौरा इसी प्रयास की श्रंखला है। सांप्रदायिक लोग दिलों में दूरियां पैदा करने का काम करते हैं। जमीयत उलमा-ए-हिंद दिलों को जोड़ने का काम करती है। उन्होंने अंत में कहा कि कुछ लोग सत्ता के लिए नफ़रत की राजनीति कर रहे हैं, इसलिए हमें आम लोगों को जागरुक करना होगा। हमारा प्रयास होना चाहिए कि इस देश में सदीयों से हिंदूओं और मुस्लमानों के बीच जो एकता स्थापित है उसे टूटने न दें। मुसलमान हिंदूओं के दुख-सुख में शामिल हों और हिंदू भाई मुसलमानों के दुख-सुख में शामिल हों। इस से ही समाज में एकजुटता और आपसी एकता को बढ़ावा दिया जा सकता है।



On the direction of Maulana Arshad Madani, a delegation of Jamiat Ulama-i-Hind visits Hathras of Uttar Pradesh

In the meeting of the delegation with the victims, financial aid of Rs.10,000 was given to the relatives of the deceased and five thousand to the injured.

Sectarians create distance in hearts, Jamiat Ulama-i-Hind works to connect hearts. Maulana Arshad Madani

New Delhi: 06 July 2024

On the direction of Maulana Arshad Madani, president of Jamiat Ulama-i-Hind, a delegation of Jamiat Ulamai-i-Hind started visiting Hathras from the second day of Hathras tragedy. This was the third visit of the delegation today, they reached Sukhnah village where four people including three members of the same family died in this tragedy.

The delegation met the families of the victims, and conveyed the message of Maulana Madani along with the financial aid, in which Maulana Madani has said that we are with you in this time of sorrow. May Allah give you courage and patience to bear this sorrow. On this, the families of the deceased said with tears in their eyes that even the organizers of the Satsang program did not come to us and no one comforted us, only you people came and comforted and consoled us with financial help. For this, we are very thankful to Madani Sahab.

Earlier, the delegation visited the hospitals in Hathras where the injured are being treated. The delegation provided financial aid of Rs.10,000 per person to the heirs of the deceased and Rs.5,000 to the injured.

It is noteworthy that apart from the government, no other organization or institution has visited here so far. Jamiat Ulama-i-Hind is the first organization that not only reached there but also provided financial aid to the victims. As the victims do not belong to any one area or district, but a large number of people from many surrounding districts and areas had gone to Satsang.


पीड़ितों को चेक देते जमीयत-ए-उलमा हिंद का प्रतिनिधिमंडल



Therefore, the units of the districts and regions have been instructed to go to the homes of the victims in their respective districts and regions, share their grief and provide financial assistance. Maulana Syed Ashhad Rashidi, president of Uttar Pradesh Jamiat Ulama, is in constant contact with the district units of Jamiat Ulama in this regard. Maulana Muhammad Ramzan Qasmi, president of Hathras Jamiat Ulama, and Maulana Furqan Nadvi, general secretary, along with their colleagues, are constantly Keeping visit, and meeting the victims and the injured in hospitals.

Maulana Arshad Madani said that Jamiat Ulama-i-Hind has been working to share love in the country for the last century, it does its relief and welfare work on the basis of humanity irrespective of religion. Because no calamity or tragedy comes by asking who is a Hindu and who is a Muslim, but whenever a calamity comes, it engulfs everyone.

In times of trouble, Jamiat Ulama-i-Hind's motto has always been to serve the creature of Allah. It has not deviated an inch from the path set by our ancestors during its long journey.

Maulana Madani said that there are people in the country who identify people by religion and dress. We want to ask such people to come and identify people by religion and dress, and see what is the action and character of such people.

People of different religions and caste have been living in mutual respect for centuries. But in the last few years, the rise of communalism, religious extremism and the way politics of hatred has been started has created a distance between people. The Jamiat Ulama-i-Hind has been trying to overcome this distance through its actions and roles. The visit of Jamiat Ulama-i-Hind delegation to Hathar is a continuation of this effort. Sectarians work to create distance in hearts. Jamiat Ulama Hind works to connect hearts.

At last, Maulana Madani said that some people are doing politics of hatred for power, so we have to wake up the common people. We should try not to break the unity that has existed between Hindus and Muslims in this country for centuries.

Muslims should join Hindus in the happiness and sorrows, and Hindu brothers should join Muslims in the joys and sorrows. Only through this, solidarity and mutual unity can be promoted in society.

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