मदरसों के सर्वे को लेकर भड़के मौलाना अरशद मदनी, कहा- असम जैसे हालात पैदा न करे योगी सरकार


नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वेक्षण कराए जाने के राज्य सरकार के फैसले से विवाद पैदा हो गया है। मुस्लिम संगठन सर्वेक्षण के उद्देश्य और समय को लेकर संदेह जता रहे हैं। इस संबंध में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख और दारुल उलूम देवबंद संस्थान के प्रधानाचार्य मौलाना अरशद मदनी से भाषा के पांच सवाल और उनके जवाब

सवाल: मुस्लिम संगठनों को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वेक्षण कराए जाने से क्या ऐतराज़ है? सरकार पाठ्यक्रम, बुनियादी ढांचे आदि की जानकारी लेना चाहती है।

जवाब: मेरे ख्याल में, इस वक्त यह काम नहीं होना चाहिए था। एक तरफ तो मुल्क में फिरकापरस्त ताकतों ने ऐसा माहौल पैदा कर दिया है कि मानो सरकार की हर नीति उसके (मुसलमान के) खिलाफ है, मगर हकीकत ऐसी नहीं है। माहौल ऐसा बना दिया गया है कि मुसलमान यह समझ रहा है कि हुकूमत उसकी बेहतरी की कोई चीज़ सामने नहीं ला रही है। दूसरी बात यह है कि इसी वक्त असम में मदरसों पर बुलडोज़र चल रहे हैं और कहा जा रहा है कि भारत के मदरसे देश विरोधी ताकतों का केंद्र बन गए हैं। इसने मुसलमानों को बेवजह बदनाम कर दिया है, लेकिन हमें नहीं लगता कि मदरसों का सर्वेक्षण करने में कोई गलत बात है और इससे मदरसों का कोई नुकसान होगा, लेकिन हालात की वजह से मुसलमानों को अंदेशा है।

सवाल: मुसलमानों के नुमाइंदों को सरकार की मंशा पर शक क्यों है?

जवाब: मुसलमान शक के दायरे में हैं। असम में मदरसों पर बुलडोजर चला दिए गए। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुलडोज़र चलवाए हैं। शर्मा एक ज़माने से असम में मंत्री रहे। वह तरुण गोगोई की सरकार में मंत्री थे। इसके बाद भाजपा की सरकार में मंत्री रहे और अब वह मुख्यमंत्री हैं। उन्हें आज तक मदरसों का ताल्लुक गैर मुल्की एजेंसियों के साथ नज़र नहीं आया? इसे देखकर मुसलमान यह समझ रहा है कि मदरसों को लेकर जो रुख असम में अख्तियार किया गया है, कहीं ऐसा ही रुख उत्तर प्रदेश में भी अख्तियार न कर लिया जाए, क्योंकि दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है। इसलिए सर्वेक्षण अभी न कराके बाद में कराया जाता तो इसमें कोई मसला नहीं था।

सवाल: सर्वेक्षण के ऐलान से पहले अगर मुस्लिम संगठनों को भरोसे में लिया जाता तो क्या यह ऐतराज़ नहीं होता?

जवाब: सर्वेक्षण के ऐलान से पहले मुस्लिम तंज़ीमों को भरोसे में लिया जाना चाहिए था। यह बता दिया जाता कि सर्वेक्षण से कोई नुकसान नहीं है। करीब 16 हजार मदरसे इलाहाबाद बोर्ड से संबद्ध हैं। मिसाल के तौर पर हमें यह बता दिया जाता कि सरकार यह जानना चाहती है कि कितने ऐसे मदरसे हैं जो बोर्ड से संबद्ध नहीं हैं, बच्चे क्या पढ़ रहे हैं, मदरसे की ज़मीन किन लोगों की है। इन तमाम चीज़ों को मालूम किया जाए तो इसमें कोई ऐतराज़ नहीं है। पहले दिलों को संतुष्ट करना चाहिए। इस वक्त मुसलमान का दिल पूरे मुल्क में संतुष्ट नहीं है।

सवाल: इल्ज़ाम लगाया जाता है कि मदरसों में आतंकवाद सिखाया जाता है। इस इल्ज़ाम को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: हम मदरसों में कुरान और हदीस (पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाएं) पढ़ाते हैं। हमारे कुरान और हदीस में कोई आतंकवाद नहीं सिखाया जाता है। मदरसों में आतंकवाद से संबंधित कुछ नहीं सिखाया जाता है। मदरसों में दीन (इस्लामी शिक्षा) पढ़ाया और सिखाया जाता है। मदरसों में पढ़ने वालों ने अगर मुल्क के खिलाफ कोई कदम उठाया हो तो हमें बताएं। उन्होंने जान हथेली पर रखकर मुल्क की आज़ादी के लिए काम किया है।

सवाल: मदरसे चलाने वाले कुछ लोगों का आतंकवाद से कथित रूप से रिश्ते निकलने पर असम में हाल में कई मदरसों पर बुलडोजर चलाया गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि सभी तोड़े गए मदरसे अलकायदा के दफ्तर थे। इस पर आप क्या कहेंगे?

जवाब: यह अजीबोगरीब बात है। उनके प्रशासन के लोगों में से कोई कहता है कि ये सरकार से बिना मंजूरी लिए बने थे और कोई कहता है कि यह जंगल की जमीन पर बने थे। कोई कहता है कि इन मदरसों के नक्शे पास नहीं थे और फिर मुख्यमंत्री ने इस पर बहुत बड़़ा इल्जाम लगा दिया कि इनका अलकायदा से ताल्लुक था। किसी सूबे का मुख्यमंत्री जब कोई बात कहे तो वह सबूत के साथ कहे। वह कयामत तक सबूत पेश नहीं कर सकते कि इन मदरसों को चलाने वालों का संबंध अलकायदा से था और कहने को तो कोई भी व्यक्ति कुछ भी कह सकता है। ये तो पुराने मदरसे हैं। शर्मा पहले कांग्रेस और भाजपा की सरकारों में मंत्री थे तथा अब मुख्यमंत्री हैं। पहले तो उन्हें मदरसों में अलकायदा नज़र नहीं आया? मेरा यह दावा है कि कोई मदरसा अलकायदा से नहीं जुड़ा है।


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